शनिवार, 28 सितंबर 2013

2013 की जीउतिया पर तुलसी बीर का मूर्तिकरण

एक और वीरपुरुष का मूर्तिकरण
भूइयां जाति दक्षिण बिहार की प्रमुख दलित जाति है। इसकी चेतना के विकास में अनेक लोग लगे अपने अपने नजरिये से। अब इनके भी स्वजातीय विधायक मंत्री वगैरह हो गये हैं। पुराने भूइयां समर्थक समाजसेवियों से अब लगाव घटने लगा है, फिर भी संबंध तो है ही।
पहले जीउत/जीमूत, फिर तुलसी बीर, फिर आजके विख्यात बिहार के ब्रांड विकास पुरुष, गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड वाले दशरथ मांझी इनके महापुरुष हैं। महापुरुष बनने तक की तपस्या को सभी नमन करते हैं। ये महापुरुष पहले केवल कथा और गााथा तक सीमित थे। कल 2013 की जीउतिया पर भूइयां कल्याण के स्वयंभू विशेषज्ञों ने सोचा कि अब तुलसी बीर की भी मूर्ति बना कर मेला लगाया जाय फिर मौका देख कर किसी सार्वजनिक स्थान पर मूर्ति भी लगा दी जाय।
जयप्रकाश नारायण के असली अनुयायी होने के दावेदार छात्र युवा संघर्षवाहिनी, संपूर्णक्रांति के सदस्य लोगों ने जिसे ब्राह्मणवाद की आज तक निंदा की उन्हीं लोगों ने बाकायदा तुलसी वीर की प्रतिमा बनवाया, ठीक जिउतिया के दूसरे दिन तुलसी वीर की प्रतिमा की घूप, चौकोर वेदी बना कर पूजा कराई, कलश स्थापित कराये, एक झंडा भी महावीरी झंडे के समतुल्य बनाया गया, कुछेक बौद्ध भिक्षु भी आये, मेरे जैसे कुछ लोग भी आये जनाधारित वन महोत्सव के समय पौधा देने एवं जलाशय बनाने के लिये चंदा जुटाने।
बाद में राम मंदिर और भाजपा की तर्ज पर हरेक गांव के हरेक परिवार से एर्क इंट लाने का प्रस्ताव भी ध्वनि मत से पारित हुआ। पर्दे के पीछे के आयोजकों की जाति का उल्लेख जरूरी नहीं है, शिवा इस जानकारी के कि इसमें न ब्राह्मण थे, न भूइयां। इस मंदिर के पुजारी और संपत्ति के महंथ का निर्णय आना बाकी है कि वे गैर भूइयां होंगे या भूइयां।
इस पूरे अभियान में इतिहास और साधनापरक बातें छूट ही गईं। तुलसी बीर गायन में कश्मीर गढ़ और कश्मीर शैव पंरपरा के अंतर्गत श उससे जुड़े वीर शैव साधना जो भूइयां के पास उसकी गाथा में थी और कुछ व्यवहारों में भी वह अब और धंधली हो जायेगी।
मित्रों, किसी भी देवी देवता के मंदिर निर्माण तथा र्मूिर्तकरण की अनिवार्य प्राथमिकता होती है पुराने देवी, देवता, पुजारी महंथ की निंदा तभी तो नये का महत्त्व बढेगा। नये मंत्रों ‘‘ इंकलाब जिंदाबाद’’, ‘‘तुलसी बीर अमर रहें’’ ‘‘ क्रांतिकारी अभिनंदन’’ आदि से भी जयघोष हुआ। तुलसी बीर के मामलें में यह पूर्व खंड संपन्न हो गया। उत्तर खंड की कथा प्रगट होने पर सुनाई जायेगी। तब तक चित्र देखिये-




3 टिप्‍पणियां:

  1. अद्भुत सूचना ... लाजवाब प्रस्तुति । भुइया जाती के व्यवहारिक रिवाज पर बढिया जानकारी मिली ।

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  2. इस टिप्पणी को ब्लॉग के किसी एडमिन ने हटा दिया है.

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  3. अद्भुत सूचना ... लाजवाब प्रस्तुति । भुइया जाती के व्यवहारिक रिवाज पर बढिया जानकारी मिली ।

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