मंगलवार, 1 मार्च 2016

मुझे शिकायत है

मुझे शिकायत है
1 एक शब्द से, जिसके कारण रोज मेरी हेठी होती है।
2 अपने गांवों वाले देश में मुझे घटिया किश्म का आदमी समझा जाता है।
3 मेरी पहचान कानूनी तौर पर बदल दी जाती है, वह भी झूठे अर्थ में।
4 यदि मैं उसे न मानूं तो आप मुझे देश द्रोही भी कह सकते हैं।
5 मैं पूरा देशी-देहाती आदमी हूं, न कभी विदेश गया न जाने का सपना है नेपाल तक जाने का मौका नहीं मिला, जो पास में है और पसासपोर्ट की भी दरकार नहीं है।
6 हम से ऐसी हिकारत क्यों?
सवाल मेरे भी हैं-
7 क्या यह देश केवल नागरिकों का है?
8 या फिर शहरी लोगों का?
9 या सिटिजन्स का
10 गांव में रहने वालों, उस पहचान से जीने वालों का क्यों नहीं?
यह नागरिकता क्यों इतनी कीमती है? मेरे मन की पीड़ा क्या किसी को कभी साली? क्या इस शब्द को बदल नहीं देना चाहिए? 

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें