सोमवार, 1 दिसंबर 2014

दीक्षा तिथि की पूर्व संध्या पर

दीक्षा तिथि की पूर्व संध्या पर आप सबों को वंदन, अभिनंदन
ब्रह्मलीन गुरुदेव, स्वैच्छिक जन्म की प्रतीक्षा में लगे पितामह एवं अपने से बड़े सभी लोगों को सादर चरण स्पर्श पूर्वक प्रणाम और शिष्यों को उनके सफल होने की मंगल कामना।
मैं कल, अर्थात गीता जयंती के ब्राह्म मुहूर्त में विधिवत साधना की दृष्टि से 36 साल का हो जाऊंगा। 1978 में एकादशी द्वादशी के बीच वाले ब्राह्म मुहूर्त में दीक्षा हुई और पहले ही ध्यान में सूर्योदय हो गया। गुरु जी ने आशीर्वाद दिया जो होना था सो हो गया। मेरे जैसे अज्ञानी को भरोसा करने में ही 20 साल से अधिक लग गये। इस बीच बहुत उलझा, फिर सुलझा।
तीन युग बीत गये। चौथे में अब सब समेटने की साधना शुरू और सबसे पहले आंकांक्षाओं फिर साधना को भी तो समेटना है क्योंकि इसके बाद तो यह शरीर भी क्या पता उस लायक रहे या न रहे। उसे भी तो समेटना होता ही है।

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